Monday, 13 December 2021
Sunday, 12 December 2021
दुनिया औकात बताने लगती है
Thursday, 9 December 2021
रिश्ते सहेज कर रखें
Wednesday, 1 December 2021
बंदर के हांथ उस्तरा
Tuesday, 23 November 2021
हमारे और आपके जैसे युवा
Thursday, 28 October 2021
Tuesday, 12 October 2021
नव निर्माण
मेरे जैसे कवि
Thursday, 30 September 2021
मुर्गे की.तरह बांग लगाते हैं
Monday, 23 August 2021
Sunday, 25 July 2021
शेर अगर.शाकाहारी बन जाएगा
यदि शेर अगर शाकाहारी बन जाएगा
झुंड सियारों का उसको फिर खाएगा
लोमडियां चाल चलेंगी वन में नए नए
क्या फिर राज सिंह यहां कर पाएगा
चापलूस चमगादड़ लटकेंगे सर पर
उल्लू सलाहकार सा मति भरमाएगा
गीदड़ है मौसेरा झुंड सियारों का जानो
नाहक क्या रास्ते वो तुमको बतलाएगा
यहां सियासी तोते भजन रटेंगें दिनभर
बंदर कुर्सी की खातिर स्वांग दिखाएगा
कोयल ढूंढेगी घोसले फिर कौवों के
बगुला फिर भक्त बनकर घात लगाएगा
हाल यही है अब मानव का समझ रहे हैं
पाप करे पहले फिर जा गंगा में धोएगा
मतलब दिखता है जब सबको हर रिश्ते में
राम राज्य इस कलयुग में फिर कैसे आएगा
पं.अश्वनी मिश्रा. Kavi Ashwani Mishra
Thursday, 24 June 2021
Tuesday, 15 June 2021
जय जय कृपाल करते हैं
Sunday, 13 June 2021
जो सारा जीवन आग रहा है
Saturday, 12 June 2021
बडी़ तकलीफ देती हैं किसी की यह अदांए
Thursday, 10 June 2021
कैसे पल भर में ठंडा हो जाए
Sunday, 6 June 2021
निजात पाया जाए
Thursday, 3 June 2021
तन्हाइयां बडी़ हैं
Tuesday, 1 June 2021
Monday, 31 May 2021
Thursday, 27 May 2021
Wednesday, 26 May 2021
Saturday, 15 May 2021
बेरोजगार जिंदगी
मशीनें हैं काम पर ,अब बेरोजगार जिंदगी
सच कहूं काहिलपने का कारोबार जिंदगी
मेहनत नहीं होगी ना होगी कोई अब मजूरी
कहने को बातें होगीं रुपयों से प्यार जिंदगी
नुक्सान कौन चाहता सब चाहते नफा.यहां
मैं हर दफा यह कह रहा व्यापार जिंदगी
कहने को सूरत नहीं बदलती सीरत बदल रही
अपने कहाँ गए वो जिनपे वार दूं मैं सौ बार जिंदगी
प्रेम प्रेम ना रहा ना अब यहां बस स्वार्थ रह गया
झूठ रह गया फरेब रह गया हुई अंधियार जिंदगी
चाह रहे हैं वो भी उड़ना जिनको चलना ना आया
वो अब भी हैं भूल रहे कि किनकी कर्जदार जिंदगी
समय नहीं हैं समय नहीं जो केवल नित रटते हैं
उनको भी दे रखी है प्रकृति ने यहाँ उधार जिंदगी
जीवन के सुख दुख भूलो केवल कर्म किए जाओ
ये समझ अगर आ जाए तो समझो दमदार जिंदगी
पं. अश्वनी मिश्रा
Wednesday, 12 May 2021
Saturday, 8 May 2021
रूदालियां
जमाना हैं जनानियों का उन्हीं की मनमानी हैं
मुंह लाल मेकअप से मरा आंखों का पानी हैं
चार जमात पढ़ लिया तो गैरत भूल बैठी
अदब है सब ताक में यही उसकी कहानी है
आंखों में सजा रखें हैं आंसू घडियाली.अपने
कहती हैं रुदालियां भी यहां अब खानदानी हैं
पं.अश्वनी मिश्रा
Monday, 19 April 2021
Wednesday, 14 April 2021
Tuesday, 13 April 2021
घर तुम्हारे भी जलेंगे मेरा घरौंदा जलानें वालोंखौफ खाओ खुदा का यूं आग लगाने वालों पं.अश्वनी मिश्रा
घर तुम्हारे भी जलेंगे मेरा घरौंदा जलानें वालों
खौफ खाओ खुदा का यूं आग लगाने वालों
पं.अश्वनी मिश्रा