Sunday, 12 December 2021

दुनिया औकात बताने लगती है

शरीफ लोगों को ये दुनिया सताने लगती है
चलते फिरते दो चार लात लगाने लगती है
आज कल दौर नहीं है सादगी का प्यारे
बात बात में दुनिया औकात बताने लगती है
पं.अश्वनी मिश्रा

Thursday, 9 December 2021

रिश्ते सहेज कर रखें

गिरते हुए का सहारा बनकर उसे उठाना भी चाहिए
हालात कैसे भी हों कम से कम बताना भी चाहिए 
यूं तो आजकल राह चलते भी भाई बोलते हैं लोग
रिश्ते बनाने से कुछ नही होता निभाना भी  चाहिए
पं.अश्वनी मिश्रा

Wednesday, 1 December 2021

बंदर के हांथ उस्तरा

जब जब बंदरों के हांथ उस्तरे लगे हैं
तब दाढ़ी नहीं केवल गले ही कटे हैं
पं.अश्वनी मिश्रा

Tuesday, 23 November 2021

हमारे और आपके जैसे युवा

हमारे और आपके जैसे युवा राजनीति के पटल पर मात्र बारहवें और तेरहवें  खिलाड़ी की तरह हैं जो सिर्फ पानी पिलाने और फिल्डिंग करने के काम आते हैं
पं.अश्वनी मिश्रा

Thursday, 28 October 2021

यूं ही नहीं हुआ

मुसलसल हुआ कुछ यूं कि
अब तक यूं ही कुछ भी नहीं हुआ
पं.अश्वनी मिश्रा

Tuesday, 12 October 2021

नव निर्माण

अब मानव में दया नहीं जब मानव के प्रति
पाप यहां बढ़ने लगा पापी नित करते अति
लगता है समय आ गया फिर से नवनिर्माण का
इसलिए तो मर रही है यहाँ अब लोगों की मति
पं.अश्वनी मिश्रा

मेरे जैसे कवि

पता नहीं आज कल यहां कहां कहां घूमते हैं मेरे जैसे कवि
अब यहां सियासतदानों के कसीदों में झूमते हैं मेरे जैसे कवि
पाठ दुनिया को पढ़ाते हैं खुद्दारी का मगर सच यह भी है सुनो
मंचों की खातिर किसके किसके चरण चूमते हैं मेरे जैसे कवि
पं.अश्वनी मिश्रा

Thursday, 30 September 2021

मुर्गे की.तरह बांग लगाते हैं

बढते हैं लोग जब सराफत से तो कुछ टांग अडा़ते हैं
बुरा हो वक्त तो यहाँ खुद के हमदर्द भी स्वांग रचाते हैं
बन गए जो तुम्हारी डूबती नाव के खिवैया तो समझो
ताउम्र वो तुम्हें कहीं से भी मुर्गे की तरह बांग लगाते हैं
पं.अश्वनी मिश्रा

Wednesday, 8 September 2021

नाम उद्धव रख लेने से हर कोई ज्ञानी नहीं हो जाता

Monday, 23 August 2021

जीव जंतुओं का हिस्सा काट दो
ये ज़मीं बांट दो आसमां बांट दो
पं.अश्वनी मिश्रा
सुनो राम पर गाने वालों
यहां पैसा खूब कमाने वालों
कब तक मुंह में दही रहेगा
खुद को श्रेष्ठ बताने वालों
पं.अश्वनी मिश्रा

Sunday, 25 July 2021

शेर अगर.शाकाहारी बन जाएगा

यदि शेर अगर शाकाहारी बन जाएगा
झुंड सियारों का उसको फिर खाएगा
लोमडियां चाल चलेंगी वन में नए नए
क्या फिर राज सिंह यहां कर पाएगा

चापलूस चमगादड़ लटकेंगे सर पर
उल्लू सलाहकार सा मति भरमाएगा
गीदड़ है मौसेरा झुंड सियारों का जानो
नाहक क्या रास्ते वो तुमको बतलाएगा

यहां सियासी तोते भजन रटेंगें दिनभर
बंदर कुर्सी की खातिर स्वांग दिखाएगा
कोयल ढूंढेगी घोसले फिर कौवों के
बगुला फिर भक्त बनकर घात लगाएगा

हाल यही है अब मानव का समझ रहे हैं
पाप करे पहले फिर जा गंगा में धोएगा
मतलब दिखता है जब सबको हर रिश्ते में
राम राज्य इस कलयुग में फिर कैसे आएगा

पं.अश्वनी मिश्रा. Kavi Ashwani Mishra  

Thursday, 24 June 2021

शेर

अंधेरों से कह दो हद में रहे
अपनी कह दो सरहद में रहे
पं.अश्वनी मिश्रा

Tuesday, 15 June 2021

जय जय कृपाल करते हैं

ये टोंटी वाले शायर भी अब कमाल करते हैं
सिर्फ जालीदार टोपी को ही सलाम करते हैं
यूं चुनाव आते ही ख्याल इनको आता जो
अपने बापू की धोती को यह रूमाल करते हैं

एक झाडू वाले हैं देखो हाथ दे ख्याल करते हैं
मंदिरों को दे धोखा खुशामते सिर्फ इमाम करते हैं
दिल्ली वाली जनता को जो दे दिया है फ्री झांसा
रोज रोज अब देखो बस उसको हलाल करते हैं

इक बुआ और दीदी हैं दोनों बस बवाल करते हैं
घूम फिर साइकिल से बाबा से सवाल करते हैं
यहां लालटेन वाले लल्ला संग चिराग लेकर के
देखो घोटालेबाजों को फिर मालामाल करते हैं

पंजें वाले बाबू तो केवल बस मलाल करते हैं 
यह चुनाव आते ही सुनों सबकी लाल करते हैं
और चुनाव जाते ही इनको नानी याद आती है
भाग इटली नानी की गोदी में ये धमाल करते हैं

बाबा तेरे भगवा का यहां ना जवाब है कोई
भक्त सभी भोले के जय बम बम विशाल करते हैं
आन दांव पर फिर से दिख रही इस अखाड़े में
राम भक्त मिलकर के जय जय कृपाल करते हैं

पं.अश्वनी मिश्रा

















Sunday, 13 June 2021

जो सारा जीवन आग रहा है

रात रात जो जाग रहा है 
इधर उधर वो भाग रहा है
कैसे पल भर में ठंडा हो जाए
जो सारा जीवन आग रहा हैं

ज्वालाओं को लिए समेटे
जो कुछ बौनों की खातिर
हर झंझट से टकराता है
जैसे लडता है योद्घा सातिर

मुश्किल को यदि पार कर गया
तो विजय स्वयं ही पा जाएगा
देख रहा नित जो खुली आंख से
उन सपनों का कल पल आएगा

पं.अश्वनी मिश्रा

Saturday, 12 June 2021

बडी़ तकलीफ देती हैं किसी की यह अदांए

बडी़ तकलीफ हैं देती किसीकी ये अदांए
कोई सिद्दत.से काटता है हंस कर सजाएं

वक्त बेवक्त दिल दुखता ही रहता है यहाँ जब
बेवफाई के बोझ से घुट रहीं हैं अब फिजाएं

दोष किसको दें बताओ जख्म ये किसको दिखाएं
बन गया जो रिश्ता जबरदस्ती में बोलो क्यों निभाएं

जब चलने का मन में तुम्हारे हौसला ही नहीं था
तो बताओ इस सफर में हम साथ तेरे क्यों जाएंँ

रास्ते जब हो गए हैं अलग तो सुनो खत्म कर दो
 बचा जो दरमियाँ अपने क्यों ना उससे निजात पाएं

पं.अश्वनी मिश्रा

Thursday, 10 June 2021

कैसे पल भर में ठंडा हो जाए

रात रात जो जाग रहा है 
इधर उधर वो भाग रहा है
कैसे पल भर में ठंडा हो जाए
जो सारा जीवन आग रहा हैं

ज्वालाओं को लिए समेटे
जो कुछ बौनों की खातिर
हर झंझट से टकराता है
जैसे लडते हों  योद्घा सातिर

मुश्किल को यदि पार कर गया
तो विजय स्वयं ही पा जाएगा
देख रहा नित जो खुली आंख से
उन सपनों का कल पल आएगा

पं.अश्वनी मिश्रा

Sunday, 6 June 2021

निजात पाया जाए

जो निभ नहीं सकता हो फिर क्यों निभाया जाए
बेहतर है जबरदस्ती के रिश्तों से निजात पाया जाए

बाहर कौन से दुश्मनों की कमी हैं जो अब
जानबूझकर स्वयं के घर में ही उसे बसाया जाए

सांप की फितरत होती है पलट कर काटने की 
जानते हुए भी यह आखिर दूध क्यों पिलाया जाए

चार लोग क्या कहेंगे चार लोग क्या कहेंगे
इस बात को सोचकर क्यों खुद का भेजा खपाया जाए

माना मुश्किलें और भी आएंगी जीवन में इस तरह
चलो  राम का नाम ले उन्हें गले से अब लगाया जाए
पं.अश्वनी मिश्रा


 




Thursday, 3 June 2021

तन्हाइयां बडी़ हैं

इन खूबसूरत चेहरों के पीछे झाईयां बडी़ हैं
मैं जिस सफर में हूं उसमें तन्हाईयां बडी़ हैं
कहने को तो हमसफ़र मुझको मिला था इक
बेगैरत है निकला वो अब रुसवाइयां बडी़ हैं
पं. अश्वनी मिश्रा

Monday, 31 May 2021

शेर

मरना है सभी को ही मगर अब देखना 
यह कि कौन कितनी दफा कैसे मरेगा
पं.अश्वनी मिश्रा

Saturday, 15 May 2021

बेरोजगार जिंदगी

मशीनें हैं काम पर ,अब बेरोजगार जिंदगी
सच कहूं काहिलपने का कारोबार जिंदगी

मेहनत नहीं होगी ना होगी कोई अब मजूरी
कहने को बातें होगीं रुपयों से प्यार जिंदगी

नुक्सान कौन चाहता सब चाहते नफा.यहां
मैं हर दफा यह कह रहा व्यापार जिंदगी

कहने को सूरत नहीं बदलती सीरत बदल रही
अपने कहाँ गए वो जिनपे वार दूं मैं सौ बार जिंदगी

प्रेम प्रेम ना रहा ना अब यहां बस स्वार्थ रह गया
झूठ रह गया फरेब रह गया हुई अंधियार जिंदगी

चाह रहे हैं वो भी उड़ना जिनको चलना ना आया
वो अब भी हैं भूल रहे कि किनकी कर्जदार जिंदगी

समय नहीं हैं समय नहीं जो केवल नित रटते हैं
उनको भी दे रखी है प्रकृति ने यहाँ उधार जिंदगी

जीवन के सुख दुख भूलो केवल कर्म किए जाओ
ये समझ अगर आ जाए तो समझो दमदार जिंदगी

पं. अश्वनी मिश्रा

Saturday, 8 May 2021

रूदालियां

जमाना हैं जनानियों का उन्हीं की मनमानी हैं
मुंह लाल मेकअप से मरा आंखों का पानी हैं

चार जमात पढ़ लिया तो गैरत भूल बैठी
अदब है सब ताक में यही उसकी कहानी है

आंखों में सजा रखें हैं आंसू घडियाली.अपने
कहती हैं रुदालियां भी यहां अब खानदानी हैं
पं.अश्वनी मिश्रा

Tuesday, 13 April 2021

घर तुम्हारे भी जलेंगे मेरा घरौंदा जलानें वालोंखौफ खाओ खुदा का यूं आग लगाने वालों पं.अश्वनी मिश्रा

घर तुम्हारे भी जलेंगे मेरा घरौंदा जलानें वालों
खौफ खाओ खुदा का यूं आग लगाने वालों

पं.अश्वनी मिश्रा

Thursday, 25 February 2021

आना जाना लगा रहेगा


जीवन है तो सुख दुख का गाना लगा रहेगा
यूं लोगों का लोगों से खोना पाना लगा रहेगा
दुनिया स्वार्थ से चलती है हरदम ही ये याद रहे
अच्छे लोगों का दुनिया में आना जाना लगा रहेगा
पं. अश्वनी मिश्रा