Kavi Ashwani Mishra
Thursday, 3 June 2021
तन्हाइयां बडी़ हैं
इन खूबसूरत चेहरों के पीछे झाईयां बडी़ हैं
मैं जिस सफर में हूं उसमें तन्हाईयां बडी़ हैं
कहने को तो हमसफ़र मुझको मिला था इक
बेगैरत है निकला वो अब रुसवाइयां बडी़ हैं
पं. अश्वनी मिश्रा
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