Kavi Ashwani Mishra
Thursday, 28 October 2021
यूं ही नहीं हुआ
मुसलसल हुआ कुछ यूं कि
अब तक यूं ही कुछ भी नहीं हुआ
पं.अश्वनी मिश्रा
Tuesday, 12 October 2021
नव निर्माण
अब मानव में दया नहीं जब मानव के प्रति
पाप यहां बढ़ने लगा पापी नित करते अति
लगता है समय आ गया फिर से नवनिर्माण का
इसलिए तो मर रही है यहाँ अब लोगों की मति
पं.अश्वनी मिश्रा
मेरे जैसे कवि
पता नहीं आज कल यहां कहां कहां घूमते हैं मेरे जैसे कवि
अब यहां सियासतदानों के कसीदों में झूमते हैं मेरे जैसे कवि
पाठ दुनिया को पढ़ाते हैं खुद्दारी का मगर सच यह भी है सुनो
मंचों की खातिर किसके किसके चरण चूमते हैं मेरे जैसे कवि
पं.अश्वनी मिश्रा
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