यदि शेर अगर शाकाहारी बन जाएगा
झुंड सियारों का उसको फिर खाएगा
लोमडियां चाल चलेंगी वन में नए नए
क्या फिर राज सिंह यहां कर पाएगा
चापलूस चमगादड़ लटकेंगे सर पर
उल्लू सलाहकार सा मति भरमाएगा
गीदड़ है मौसेरा झुंड सियारों का जानो
नाहक क्या रास्ते वो तुमको बतलाएगा
यहां सियासी तोते भजन रटेंगें दिनभर
बंदर कुर्सी की खातिर स्वांग दिखाएगा
कोयल ढूंढेगी घोसले फिर कौवों के
बगुला फिर भक्त बनकर घात लगाएगा
हाल यही है अब मानव का समझ रहे हैं
पाप करे पहले फिर जा गंगा में धोएगा
मतलब दिखता है जब सबको हर रिश्ते में
राम राज्य इस कलयुग में फिर कैसे आएगा
पं.अश्वनी मिश्रा. Kavi Ashwani Mishra