Monday, 31 May 2021

शेर

मरना है सभी को ही मगर अब देखना 
यह कि कौन कितनी दफा कैसे मरेगा
पं.अश्वनी मिश्रा

Saturday, 15 May 2021

बेरोजगार जिंदगी

मशीनें हैं काम पर ,अब बेरोजगार जिंदगी
सच कहूं काहिलपने का कारोबार जिंदगी

मेहनत नहीं होगी ना होगी कोई अब मजूरी
कहने को बातें होगीं रुपयों से प्यार जिंदगी

नुक्सान कौन चाहता सब चाहते नफा.यहां
मैं हर दफा यह कह रहा व्यापार जिंदगी

कहने को सूरत नहीं बदलती सीरत बदल रही
अपने कहाँ गए वो जिनपे वार दूं मैं सौ बार जिंदगी

प्रेम प्रेम ना रहा ना अब यहां बस स्वार्थ रह गया
झूठ रह गया फरेब रह गया हुई अंधियार जिंदगी

चाह रहे हैं वो भी उड़ना जिनको चलना ना आया
वो अब भी हैं भूल रहे कि किनकी कर्जदार जिंदगी

समय नहीं हैं समय नहीं जो केवल नित रटते हैं
उनको भी दे रखी है प्रकृति ने यहाँ उधार जिंदगी

जीवन के सुख दुख भूलो केवल कर्म किए जाओ
ये समझ अगर आ जाए तो समझो दमदार जिंदगी

पं. अश्वनी मिश्रा

Saturday, 8 May 2021

रूदालियां

जमाना हैं जनानियों का उन्हीं की मनमानी हैं
मुंह लाल मेकअप से मरा आंखों का पानी हैं

चार जमात पढ़ लिया तो गैरत भूल बैठी
अदब है सब ताक में यही उसकी कहानी है

आंखों में सजा रखें हैं आंसू घडियाली.अपने
कहती हैं रुदालियां भी यहां अब खानदानी हैं
पं.अश्वनी मिश्रा