जमाना हैं जनानियों का उन्हीं की मनमानी हैं
मुंह लाल मेकअप से मरा आंखों का पानी हैं
चार जमात पढ़ लिया तो गैरत भूल बैठी
अदब है सब ताक में यही उसकी कहानी है
आंखों में सजा रखें हैं आंसू घडियाली.अपने
कहती हैं रुदालियां भी यहां अब खानदानी हैं
पं.अश्वनी मिश्रा
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