जिसको ना निज कुल गौरव का अभिमान था
क्यों मना रहे हो मातम जैसे व्यक्ति महान था
जब कायरतापूर्ण कृत्य कर गया कोई जग में
कैसे कह दूं वो मेरा हीरो ही पूरा हिंदुस्तान था
अब देश का बच्चा बच्चा क्रुद्ध हो
होता है यदि युद्ध तो फिर युद्ध हो
सामने चीन या पाक आए अब बस
करना पड़े कुछ भी बस घाटी शुद्ध हो
नेहरू की गुस्ताखियां भोग रहा है देश
फिर भी कुछ बहुरुपिए घूमें बदलें भेष
घूमें बदलें भेष करें वो यहां खूब तमाशा
रोवें धोंवें खूब वो देवें पब्लिक को झांसा
जनता भोली भाली ठगी ठगी सी रहती थी
होता वही रहा है जो भी मैडम कहती थी
भारत में ही रहते हैं कुछ देशी गद्दार
हरदम देते रहते वो तलवारों पर धार
देते रहते धार करेंगे वार देश के भीतर ही
सेना जो दुश्मन मारे इनके उड़ते तीतर ही
उड़ते तीतर इनके हरदम देख सेना का बल
खाते रहे यहां किंतु करते हैं अपनों से छल
ख्वाब कई इंतजार में हैं हमें नींद नहीं आती
चलो फिर रात के अंधेरे को गुलजार करते हैं
दिन बीतते हैं बड़ी मेहनत में रातें इंतजार में
खैर जिंदगी अपनी है इसे यूं नहीं बेजार करते हैं
सब कुछ चलाए मान है इस संसार में देखो
किसी को यूं नही पागलों जैसे कभी प्यार करते हैं
बड़ा भारी कष्ट है
यहीं पे सारे दुष्ट हैं
अच्छा नहींं बोलेंगे
बुद्धि इनकी भ्रष्ट है
ये जो चांदनी रात में हवा की सरसराहट
देखता हूं आसमां जब भी तुम्हारी ही आहट है
बहुत तुम दूर हो मुझसे मालुम मुझे यह है
मगर अभी तुम्हारी याद में दिल में घबराहट है
टूट करके भी आइना आइना ही रहता है
यह जमाना है जमाना कुछ भी कहता है
बड़ी सिद्दत से सर दर्द बढ़ाते है लोग यहां
पत्थर भी दरिया के लिए क्या क्या सहता है


