Sunday, 2 August 2020

Best Poem Forever

जिसको ना निज कुल गौरव का अभिमान था
क्यों मना रहे हो मातम जैसे व्यक्ति महान था
जब कायरतापूर्ण कृत्य कर गया कोई जग में 
कैसे कह दूं वो मेरा हीरो ही पूरा हिंदुस्तान था

अब देश का बच्चा बच्चा क्रुद्ध हो
होता है यदि युद्ध तो फिर युद्ध हो
सामने चीन या पाक आए अब बस
करना पड़े कुछ भी बस घाटी शुद्ध हो


नेहरू की गुस्ताखियां भोग रहा है देश
फिर भी कुछ बहुरुपिए घूमें बदलें भेष
घूमें बदलें भेष करें वो यहां खूब तमाशा
रोवें धोंवें खूब वो देवें पब्लिक को झांसा
जनता भोली भाली ठगी ठगी सी रहती थी
होता वही रहा है जो भी मैडम कहती थी

भारत में ही रहते हैं कुछ देशी गद्दार
हरदम देते रहते वो तलवारों पर धार
देते रहते धार करेंगे वार देश के भीतर ही
सेना जो दुश्मन मारे इनके उड़ते तीतर ही
उड़ते तीतर इनके हरदम देख सेना का बल
खाते रहे यहां किंतु करते हैं अपनों से छल

 ख्वाब कई इंतजार में हैं हमें नींद नहीं आती
चलो फिर रात के अंधेरे को गुलजार करते हैं
दिन बीतते हैं बड़ी मेहनत में रातें इंतजार में
खैर जिंदगी अपनी है इसे यूं नहीं बेजार करते हैं
सब कुछ चलाए मान है इस संसार में देखो
किसी को यूं नही पागलों जैसे कभी प्यार करते हैं

बड़ा भारी कष्ट है
यहीं पे सारे दुष्ट हैं
अच्छा नहींं बोलेंगे
बुद्धि इनकी भ्रष्ट है

ये जो चांदनी रात में हवा की सरसराहट
देखता हूं आसमां जब भी तुम्हारी ही आहट है
बहुत तुम दूर हो मुझसे मालुम मुझे यह है
मगर अभी तुम्हारी याद में दिल में घबराहट है

टूट करके भी आइना आइना ही रहता है
यह जमाना है जमाना कुछ भी कहता है
बड़ी सिद्दत से सर दर्द बढ़ाते है लोग यहां
पत्थर भी दरिया के लिए क्या क्या सहता है

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