Thursday, 24 June 2021

शेर

अंधेरों से कह दो हद में रहे
अपनी कह दो सरहद में रहे
पं.अश्वनी मिश्रा

Tuesday, 15 June 2021

जय जय कृपाल करते हैं

ये टोंटी वाले शायर भी अब कमाल करते हैं
सिर्फ जालीदार टोपी को ही सलाम करते हैं
यूं चुनाव आते ही ख्याल इनको आता जो
अपने बापू की धोती को यह रूमाल करते हैं

एक झाडू वाले हैं देखो हाथ दे ख्याल करते हैं
मंदिरों को दे धोखा खुशामते सिर्फ इमाम करते हैं
दिल्ली वाली जनता को जो दे दिया है फ्री झांसा
रोज रोज अब देखो बस उसको हलाल करते हैं

इक बुआ और दीदी हैं दोनों बस बवाल करते हैं
घूम फिर साइकिल से बाबा से सवाल करते हैं
यहां लालटेन वाले लल्ला संग चिराग लेकर के
देखो घोटालेबाजों को फिर मालामाल करते हैं

पंजें वाले बाबू तो केवल बस मलाल करते हैं 
यह चुनाव आते ही सुनों सबकी लाल करते हैं
और चुनाव जाते ही इनको नानी याद आती है
भाग इटली नानी की गोदी में ये धमाल करते हैं

बाबा तेरे भगवा का यहां ना जवाब है कोई
भक्त सभी भोले के जय बम बम विशाल करते हैं
आन दांव पर फिर से दिख रही इस अखाड़े में
राम भक्त मिलकर के जय जय कृपाल करते हैं

पं.अश्वनी मिश्रा

















Sunday, 13 June 2021

जो सारा जीवन आग रहा है

रात रात जो जाग रहा है 
इधर उधर वो भाग रहा है
कैसे पल भर में ठंडा हो जाए
जो सारा जीवन आग रहा हैं

ज्वालाओं को लिए समेटे
जो कुछ बौनों की खातिर
हर झंझट से टकराता है
जैसे लडता है योद्घा सातिर

मुश्किल को यदि पार कर गया
तो विजय स्वयं ही पा जाएगा
देख रहा नित जो खुली आंख से
उन सपनों का कल पल आएगा

पं.अश्वनी मिश्रा

Saturday, 12 June 2021

बडी़ तकलीफ देती हैं किसी की यह अदांए

बडी़ तकलीफ हैं देती किसीकी ये अदांए
कोई सिद्दत.से काटता है हंस कर सजाएं

वक्त बेवक्त दिल दुखता ही रहता है यहाँ जब
बेवफाई के बोझ से घुट रहीं हैं अब फिजाएं

दोष किसको दें बताओ जख्म ये किसको दिखाएं
बन गया जो रिश्ता जबरदस्ती में बोलो क्यों निभाएं

जब चलने का मन में तुम्हारे हौसला ही नहीं था
तो बताओ इस सफर में हम साथ तेरे क्यों जाएंँ

रास्ते जब हो गए हैं अलग तो सुनो खत्म कर दो
 बचा जो दरमियाँ अपने क्यों ना उससे निजात पाएं

पं.अश्वनी मिश्रा

Thursday, 10 June 2021

कैसे पल भर में ठंडा हो जाए

रात रात जो जाग रहा है 
इधर उधर वो भाग रहा है
कैसे पल भर में ठंडा हो जाए
जो सारा जीवन आग रहा हैं

ज्वालाओं को लिए समेटे
जो कुछ बौनों की खातिर
हर झंझट से टकराता है
जैसे लडते हों  योद्घा सातिर

मुश्किल को यदि पार कर गया
तो विजय स्वयं ही पा जाएगा
देख रहा नित जो खुली आंख से
उन सपनों का कल पल आएगा

पं.अश्वनी मिश्रा

Sunday, 6 June 2021

निजात पाया जाए

जो निभ नहीं सकता हो फिर क्यों निभाया जाए
बेहतर है जबरदस्ती के रिश्तों से निजात पाया जाए

बाहर कौन से दुश्मनों की कमी हैं जो अब
जानबूझकर स्वयं के घर में ही उसे बसाया जाए

सांप की फितरत होती है पलट कर काटने की 
जानते हुए भी यह आखिर दूध क्यों पिलाया जाए

चार लोग क्या कहेंगे चार लोग क्या कहेंगे
इस बात को सोचकर क्यों खुद का भेजा खपाया जाए

माना मुश्किलें और भी आएंगी जीवन में इस तरह
चलो  राम का नाम ले उन्हें गले से अब लगाया जाए
पं.अश्वनी मिश्रा


 




Thursday, 3 June 2021

तन्हाइयां बडी़ हैं

इन खूबसूरत चेहरों के पीछे झाईयां बडी़ हैं
मैं जिस सफर में हूं उसमें तन्हाईयां बडी़ हैं
कहने को तो हमसफ़र मुझको मिला था इक
बेगैरत है निकला वो अब रुसवाइयां बडी़ हैं
पं. अश्वनी मिश्रा