जो निभ नहीं सकता हो फिर क्यों निभाया जाए
बेहतर है जबरदस्ती के रिश्तों से निजात पाया जाए
बाहर कौन से दुश्मनों की कमी हैं जो अब
जानबूझकर स्वयं के घर में ही उसे बसाया जाए
सांप की फितरत होती है पलट कर काटने की
जानते हुए भी यह आखिर दूध क्यों पिलाया जाए
चार लोग क्या कहेंगे चार लोग क्या कहेंगे
इस बात को सोचकर क्यों खुद का भेजा खपाया जाए
माना मुश्किलें और भी आएंगी जीवन में इस तरह
चलो राम का नाम ले उन्हें गले से अब लगाया जाए
पं.अश्वनी मिश्रा
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