Wednesday, 22 June 2022

दो शेर

कई आए गए हैं जहां से है बांकी
अभी तेरा भी जमीं से जुदा होना

बहुत पढ़कर भी बस डाक्टर ही बने हो
बहुत मुश्किल है तुम्हारा यूं  खुदा होना

पं.अश्वनी मिश्रा

Wednesday, 26 January 2022

दुनिया औकात बताने लगती है

शरीफ लोगों को ये दुनिया सताने लगती है
चलते फिरते दो चार लात लगाने लगती है
आज कल दौर नहीं है सादगी का प्यारे
बात बात में दुनिया औकात बताने लगती है
पं.अश्वनी मिश्रा

Monday, 17 January 2022

रावण सा अवतार

ऋषि अगस्त्य के घर में मेरा रावण सा अवतार
बाबा कहते हैं सदा एक दिन ये पुरखे देगा तार
धर्म कर्म का भेद ना जाने कर्मकांड यह कुछ ना माने
कलयुग को यह कांध बिठा कर आएगा सब हार
इसका रावण सा अवतार है इसका रावण सा अवतार
इसको भी प्रभु ढीठ समझ कर कर देना उद्धार
पं. अश्वनी मिश्रा