Friday, 2 December 2022
Wednesday, 28 September 2022
Wednesday, 22 June 2022
दो शेर
कई आए गए हैं जहां से है बांकी
अभी तेरा भी जमीं से जुदा होना
बहुत पढ़कर भी बस डाक्टर ही बने हो
बहुत मुश्किल है तुम्हारा यूं खुदा होना
पं.अश्वनी मिश्रा
Saturday, 16 April 2022
Wednesday, 26 January 2022
दुनिया औकात बताने लगती है
शरीफ लोगों को ये दुनिया सताने लगती है
चलते फिरते दो चार लात लगाने लगती है
आज कल दौर नहीं है सादगी का प्यारे
बात बात में दुनिया औकात बताने लगती है
पं.अश्वनी मिश्रा
Monday, 17 January 2022
रावण सा अवतार
ऋषि अगस्त्य के घर में मेरा रावण सा अवतार
बाबा कहते हैं सदा एक दिन ये पुरखे देगा तार
धर्म कर्म का भेद ना जाने कर्मकांड यह कुछ ना माने
कलयुग को यह कांध बिठा कर आएगा सब हार
इसका रावण सा अवतार है इसका रावण सा अवतार
इसको भी प्रभु ढीठ समझ कर कर देना उद्धार
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