ऋषि अगस्त्य के घर में मेरा रावण सा अवतार
बाबा कहते हैं सदा एक दिन ये पुरखे देगा तार
धर्म कर्म का भेद ना जाने कर्मकांड यह कुछ ना माने
कलयुग को यह कांध बिठा कर आएगा सब हार
इसका रावण सा अवतार है इसका रावण सा अवतार
इसको भी प्रभु ढीठ समझ कर कर देना उद्धार
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