Sunday, 3 November 2024
Monday, 19 August 2024
Thursday, 11 July 2024
Wednesday, 1 May 2024
मकां सब मांगते हैं अब मरम्मत बस मरम्मत
चाहते तो है हम सभी कि हो बरक्कत
तभी तो कर रहे हैं मस्क़्त बस मस्क़त
इन जुबानों के चलते ज़रा बिखराव क्या आया
मकां सब मांगते हैं अब मरम्मत फिर मरम्मत
पं.अश्वनी मिश्रा
Tuesday, 23 January 2024
शहर और गांव
हम उन शहरों के आदी हैं जहाँ गांव नष्ट होते हैं
जमीन से जुड़े हैं यूं तभी इन बातों से कष्ट होते हैं
संस्कृति होती हैं दिखावे में रोज तार तार जहाँ वहीं
जाने कितने बड़े बड़े पंडित उजाले में पथ भ्रष्ट होते हैं
पं.अश्वनी मिश्रा
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