Monday, 19 August 2024

जिन कंधों पर बैठ बडे हो जाते थे बचपन में 
सबसे ज्यादा भारी होता है उनको कंधा देना
पं.अश्वनी मिश्रा

Thursday, 11 July 2024

वो जो भगंदर वाले मुंह से कुछ भी बोल रहे हैं 
किसी और का नहीं स्वयं का मान वो तौल रहे हैं 
पता उनको भी है रास्ते में पड़ें हर पत्थर का वजन 
कुछ उस पे पड़ें कुछ उसने फेंकें यही वो राज खोल रहे हैं 
पं.अश्वनी मिश्रा 


Wednesday, 1 May 2024

मकां सब मांगते हैं अब मरम्मत बस मरम्मत

चाहते तो है हम सभी कि हो बरक्कत
तभी तो कर रहे हैं मस्क़्त बस मस्क़त 
इन जुबानों के चलते ज़रा बिखराव क्या आया 
मकां सब मांगते हैं अब मरम्मत फिर मरम्मत 
पं.अश्वनी मिश्रा 

Tuesday, 23 January 2024

शहर और गांव

हम उन शहरों के आदी हैं जहाँ गांव नष्ट होते हैं
जमीन से जुड़े हैं यूं तभी इन बातों से कष्ट होते हैं
संस्कृति होती हैं दिखावे में रोज तार तार जहाँ वहीं 
जाने कितने बड़े बड़े पंडित उजाले में पथ भ्रष्ट होते हैं
पं.अश्वनी मिश्रा