Wednesday, 10 December 2025

मुझको जानता ही कौन है एक मेरे सिवाय जानता हूं ।।पं.अश्वनी मिश्रा

मुझको जानता ही कौन है 
एक मेरे सिवाय जानता हूं ।।
पं.अश्वनी मिश्रा

हमारी गलतियां बताने वाले ख़ुदा हो गए

हमारी गलतियां बताते बताते जानें कितने खु़ुदा हो गए
हम ठहरे गांव के गंवार किया किनारा और जुदा हो गए ।।
पं.अश्वनी मिश्रा 

Tuesday, 2 September 2025

संघर्ष करेंगे

समस्या यह नहीं कि बच्चे रोटी के लिए संघर्ष करेंगे 
समस्या यह है कि कैसे वो दुष्टों का सामना सहर्ष करेंगे 
क्या हमने उनसे कुछ ऐसी तैयारी करवाई है कभी भी 
जो वो भी घटोत्कच्छ सा पुत्र वियोग का भी हर्ष करेंगे ...!!
पं.अश्वनी मिश्रा 

Sunday, 24 August 2025

रहूंगा जिंदा मैं मेरे मर जाने के बाद कोई तो करेगा गीत मुक्तक मेरे याद पं.अश्वनी मिश्रा


रहूंगा जिंदा मैं मेरे मर जाने के बाद 
कोई तो करेगा गीत मुक्तक मेरे याद 
पं.अश्वनी मिश्रा

Sunday, 17 August 2025

कुत्ता प्रेमी

ना अध्धा है ना पौव्वा है उनके पास 
ना एक आना है और ना एक पाई है 
जो पेलते है जी भर मुर्ग मुसल्लम 
उन असूरों का केवल डोगेशभाई है ।।
पं.अश्वनी मिश्रा 

Wednesday, 13 August 2025

ना आज भीमटे बुद्ध का नाम लेकर रोते

अगर उस दिन राहुल सिंह जाग जाते 
तो भला कैसे सिद्धार्थ सिंह भाग पाते 
ना राजा सुद्दोधन  राजकुमार खोते 
ना आज भीमटे बुद्ध का नाम लेकर रोते
पं.अश्वनी मिश्रा 

Tuesday, 27 May 2025

मृत्यु के उपरांत क्या होगा भला हम क्यों सोचें

मैं मांगता हूं आसान हो मृत्यु आसानी से प्राण निकलें 
फिर चाहे बाद में कुछ भी हो लाश का भले कुत्ते ही नोंचे 
उसने जो रोल दिया हमने निभाने की कोशिश तो की है 
बांकी मृत्यु के उपरांत में क्या होगा भला हम क्यों सोचें ।।
पं अश्वनी मिश्रा 

Saturday, 3 May 2025

आई टी टूल है हम

हम इंसान नहीं एक एआई टूल है अपनी कंपनियों के लिए इससे ज्यादा कुछ नहीं 
इसीलिए ना सोचों ना समझों बस करते जाओ और करते जाओ....
पं.अश्वनी मिश्रा 
We are not humans, we are an AI tool, nothing more than that for our company .
So don't think or understand, just keep doing it.
Ashwani Mishra 

Sunday, 5 January 2025

हांथ पकड़ रखा है

सबको सब कुछ चाहिए लगी हुई है होड़ 
राह है उलझन भरी है जगह जगह पे मोड़ 
साहस धैर्य अरु धीरज होते हैं कमजोर जहां 
चालाकी चतुराई मिल नित रही मनोबल तोड़
मगर हांथ पकड़ रखा है मेरे गिरधारी ने मेरा 
कोशिश करूं भटकने की पर रहा नहीं हांथ हैं छोड़ ।।
पं.अश्वनी मिश्रा 
#kaviashwanimishra