Sunday, 5 January 2025

हांथ पकड़ रखा है

सबको सब कुछ चाहिए लगी हुई है होड़ 
राह है उलझन भरी है जगह जगह पे मोड़ 
साहस धैर्य अरु धीरज होते हैं कमजोर जहां 
चालाकी चतुराई मिल नित रही मनोबल तोड़
मगर हांथ पकड़ रखा है मेरे गिरधारी ने मेरा 
कोशिश करूं भटकने की पर रहा नहीं हांथ हैं छोड़ ।।
पं.अश्वनी मिश्रा 
#kaviashwanimishra

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