Monday, 13 December 2021
Sunday, 12 December 2021
दुनिया औकात बताने लगती है
शरीफ लोगों को ये दुनिया सताने लगती है
चलते फिरते दो चार लात लगाने लगती है
आज कल दौर नहीं है सादगी का प्यारे
बात बात में दुनिया औकात बताने लगती है
पं.अश्वनी मिश्रा
Thursday, 9 December 2021
रिश्ते सहेज कर रखें
गिरते हुए का सहारा बनकर उसे उठाना भी चाहिए
हालात कैसे भी हों कम से कम बताना भी चाहिए
यूं तो आजकल राह चलते भी भाई बोलते हैं लोग
रिश्ते बनाने से कुछ नही होता निभाना भी चाहिए
पं.अश्वनी मिश्रा
Wednesday, 1 December 2021
बंदर के हांथ उस्तरा
जब जब बंदरों के हांथ उस्तरे लगे हैं
तब दाढ़ी नहीं केवल गले ही कटे हैं
पं.अश्वनी मिश्रा
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