***धोखे से भरा हरा जंगल***
(कहानी संग्रह )*
एक जंगल था जहां शेरों का एक छोटा सा झुंड था
उस झुंड का हर शेर किसी थी ताकतवर जानवर से लड़ने की क्षमता रखता था जिंदगी मजे से चल रही थी खूब मस्ती मजाक के साथ जीवन बीत रहा था तभी कहीं से एक झूठा चालबाज शेर आ गया झुंड को देख कर बोला की मेरी उम्र हो चली है मैं शिकार करने में असमर्थ हूं मेरी सहायता करो झुंड के सभी सदस्य काफी उदार थे उन्होंने सोंचा चलो झुंड में एक सदस्य भी बढ़ेगा और बाहर की दुनिया का अनुभव भी मिलेगा वो मुफ्तखोर चालाक जानवर दूसरों के शिकार पर जीवन बिताने लगा ।।
फिर उसे पता नही उसने क्या सोंचा और एक एक सदस्य के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ाता गया धीरे धीरे सभी सदस्य उसकी बातों का विश्वास करने लग गए वो पूरी तरह सबका विश्वासपात्र बन गया था ।।
फिर उसने उस झुंड के हर शेर को अपने करीब लाने के लिए एक से दूसरे की दूसरे से तीसरे की तीसरे से चौथे की भलाई बुराई करने लगा पहले तो सबने उसकी बातों को नजर अंदाज किया किंतु यह सब घटनाक्रम रोज घटित होने लगा ।।
आखिरकार उस चालबाज का जादू धीरे धीरे सब पर चलने लगा झुंड के सभी सदस्य एक दूसरे से थोड़ी दूरी बनाने लगे और इस तरह से दूरी धीरे धीरे बढ़ने लगी झुंड के कुछ शेर तो जंगल छोड़कर जाने लगे फिर हुआ कुछ यूं की अब उस झुंड का मुखिया वो चालबाज शेर बन बैठा था
और जिन शेरों के झुंड की कहानियां पूरा जंगल सुनाता था वो धीरे धीरे समाप्त हो गया था और पूरा जंगल उस चालबाज का हो गया वहां पर अब उस चालबाज की हुकूमत चलने लगी सारे जानवरों को उसकी बात माननी पड़ती है
खैर इस कहानी से बस यही सीख मिलती है जो भी अपने सगे संबंधी है उन पर विश्वास करें अगर कोई मतभेद की स्थिति आती है तो आपस में बात करें और समाधान खोजें वर्ना दोस्ती कितनी भी पुरानी क्यों ना हो आपके अपने समूह का सत्यानाश कोई बाहरी आकर कर देगा और स्थिति उन शेरों की तरह होगी जिन्हें अपने झुंड के साथ साथ जंगल भी छोड़ना पड़ा !!
पं.अश्वनी मिश्रा
No comments:
Post a Comment